नवजात शिशु बार बार लैट्रिन क्यों करते हैं?HealthPlanet

Posted on Mon 17th Oct 2022 : 15:14

शिशुओं में दस्त (डायरिया) किस वजह से होते हैं?
इसके संभावित कारणों की सूची बहुत लंबी है। आपके शिशु को विषाणुजनित (​वायरल) या जीवाणुजनित (बैक्टीरियल) इनफेक्शन की वजह से डायरिया हो सकता है। इसके अलावा इसके कारण कोई परजीवी भी हो सकता है, शिशु ने कोई एंटीबायोटिक दवाएं ली हो या फिर कुछ खाया हो।

वायरल इनफेक्शन
बहुत से विषाणु जैसे कि रोटावायरस, एडीनोवायरस, कैलिसिवायरस, एस्ट्रोवायरस और इन्फ्लूएंजा डायरिया के साथ-साथ उल्टी, पेट दर्द, बुखार और बदन दर्द का कारण हो सकते हैं।

दस्त होने का सबसे आम कारण एक विषाणु है, जिसका नाम है रोटावायरस। यह विषाणु अंतड़ियों को संक्रमित करता है, जिससे गैस्ट्रोएंटेराइटिस होता है। यह आंत की अंदरुनी परत को क्षति पहुंचाता है। इस क्षतिग्रस्त परत से तरल पदार्थ का रिसाव होता है और पोषक तत्वों का समाहन किए बिना भोजन इसमें से निकल जाता है। कुछ मामलों में रोटावायरस गंभीर मल संक्रमण और शरीर में पानी की कमी की वजह से होता है (डिहाइड्रेशन) का कारण बन सकता है।

रोटावायरस से सुरक्षा के लिए शिशु के टीकाकारण के तहत टीका लगाया जाएगा। यह एक अनिवार्य टीका है। शिशु को कौन सी वैक्सीन लगाई जा रही है, इसे देखते हुए उसे दो या तीन खुराक मिलनी चाहिए। पहली खुराक उसे छह से आठ हफ्ते की उम्र में मिलनी ​चाहिए, दूसरी खुराक 10 से 16 हफ्तों के बीच और तीसरी खुराक करीब 14 से 24 हफ्तों के बीच लगनी चाहिए।

ध्यान रखें कि छह हफ्ते से कम उम्र और चार महीने से अधिक उम्र के शिशु को इस टीके की पहली खुराक नहीं दी जा सकती है। यदि आपने यह टीका शिशु को नहीं लगवाया है, तो शिशु के डॉक्टर से बात करें।

अधिकांश वायरल डायरिया एक हफ्ते में ठीक हो जाते हैं। चूंकि ये वायरस की वजह से होते हैं, इसलिए इनका उपचार एंटिबायोटिक्स से नहीं किया जा सकता। इस दौरान अपने शिशु को स्तनपान करवाती रहें। डॉक्टर शायद शिशु को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ, जिसमें ओआरएस का घोल भी शामिल है, पिलाने की सलाह दे सकते हैं, ताकि शिशु को जलनियोजित रखा जा सके। दस्त की अवधि को कम करने के लिए डॉक्टर जिंक अनुपूरक लेने की सलाह भी दे सकते हैं।

कई बार वायरल डायरिया गंभीर हो सकता है और इससे डिहाइड्रेशन हो सकता है। यदि ऐसा हो, तो शिशु को आईवी यानि नसों के जरिये (इंट्रावीनस) तरल लेने की जरुरत हो सकती है।

बैक्टीरियल इनफेक्शन
जीवाणु जैसे कि साल्मोनेला,​ शिगेला, स्टेफिलोकोकस, कैम्फीलोबेक्टर या ई. कोली भी दस्त पैदा कर सकते हैं। यदि आपके शिशु को बैक्टीरियल संक्रमण हो, तो उसे गंभीर डायरिया के साथ-साथ मरोड़, मल में खून और बुखार भी हो सकता है। उसे उल्टी हो भी सकती है और नहीं भी।

कुछ जीवाण्विक संक्रमण अपने आप ठीक हो जाते हैं, मगर कुछ जैसे कि ई. कोलाई से होने वाले इनफेक्शन गंभीर हो सकते हैं। ई. कोलाई अधपके मांस और भोजन के अन्य स्त्रोतो में पाया जा सकता है। इसलिए यदि आपके शिशु में ये लक्षण हों, तो उसे डॉक्टर के पास ले जाएं। वह शिशु की जांच करेंगे और शायद बैक्टीरियल इनफेक्शन के संकेतों के लिए स्टूल कल्चर की जांच करना चाहेंगे।

कान का संक्रमण
कुछ मामलों में कान में इनफेक्शन (जो कि वायरल या बैक्टीरियल कुछ भी हो सकता है) दस्त की वजह बन सकता है। यदि आपके शिशु के साथ ऐसा हो, तो आप यह भी पाएंगी कि शिशु चिड़चिड़ा है और अपने कान खींचता रहता है। उसे उल्टी हो सकती है और उसकी भूख कम हो सकती है। हो सकता है उसे हाल ही में सर्दी-जुकाम हुआ हो। उसे बुखार भी हो सकता है।

परजीवी
परजीवी (पैरासाइट) संक्रमण भी डायरिया का कारण हो सकता है। उदाहरण के तौर पर जियाडाएसिस एक अति सूक्ष्म परजीवी की वजह से होता है, जो आंत में रहता है। इसके लक्षणों में गैस, फुलावट, दस्त और चिकना मल शामिल है।

इस तरह के इनफेक्शन डे केयर या समूूहों में आसानी से फैलते हैं और इनके उपचार के लिए विशेष दवा होती है, इसलिए शिशु को डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

क्रिप्टोस्पोरिडियम भी आसानी से फैलता है और वायरल संक्रमणों की तरह डायरिया पैदा कर सकता है। यह अपने आप ठीक हो जाता है, मगर शिशु की डॉक्टरी जांच की जरुरत होती।

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